एक रिपोर्ट के अनुसार, आखिर तक लगभग 2,100 से भी ज़्यादा उड़ानें रद्द हो चुकी थीं।
रद्द-शुदा उड़ानों और देरी के चलते दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद जैसे बड़े एयरपोर्ट्स पर यात्रियों को भारी असुविधा हुई — लोग फंसे, बैगेज गुम हुआ, रातों-रात एयरपोर्ट पर रहना पड़ा।
कई लोग अपनी यात्रा पूरी नहीं कर पाए, शादी, काम, अन्य प्लान बिगड़ गए।
📋 संकट की जड़ें — ऐसा क्यों हुआ?
🔹 नई पायलट / क्रू नियम (FDTL)
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इस बार समस्या की सबसे बड़ी वजह DGCA द्वारा लागू की गई नई “Flight Duty Time Limitations (FDTL)” नियमावली है — जिसे नवंबर 2025 में पूरी तरह से लागू किया गया।
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नए नियमों के तहत: पायलटों को प्रति सप्ताह अब 48 घंटे की लगातार आराम अवधि देना अनिवार्य है (पहले ~36 घंटे) रात की उड़ानों पर सीमित संख्या (night landings) लागू हुई है, और रात में ड्यूटी पर अधिक समय नहीं बिताने दिया जाता।
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इन नियमों का मकसद पायलट थकावट (fatigue) कम करना — यानी सुरक्षा बढ़ाना था। लेकिन इसके लिए एयरलाइनों को पर्याप्त क्रू (captains, first officers) और बेहतर शेड्यूलिंग की ज़रूरत थी।
🔹 तैयारी की कमी और “Lean-staffing” मॉडल
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IndiGo लंबे समय से "lean staffing" मॉडल पर काम करता रहा है — मतलब, हर फ्लाइट के लिए पर्याप्त अतिरिक्त क्रू बैक-अप न रखना, ताकि ऑपरेशन लागत कम रहे।
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जब FDTL लागू हुआ, उन्होंने अनुमान गलत लगाया कि इतने कम क्रू से काम चल जाएगा। लेकिन रियालिटी अलग निकली: पायलटों की कमी हो गई, शेड्यूल गड़बड़ा गए।
🔹 अन्य कारण — मौसम, टेक्निकल, एयरपोर्ट भीड़
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IndiGo ने बताया कि सिर्फ क्रू कमी ही नहीं, बल्कि “अनपेक्षित ऑपरेशनल चुनौतियाँ” — जैसे सर्दी (winter schedule), मौसम (fog), टेक्निकल गड़बड़ियाँ, एयरपोर्ट congestions आदि ने मिलकर समस्या को और गंभीर बना दिया।
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लेकिन ये कारण केवल “उसे बढ़ाने” वाले थे — मुख्य कारण FDTL के लिए तैयारी न करना ही रहा।
यात्रियों और देश पर असर
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यात्री लिबास, ऑफिस, शादी-समारोह, काम — हर तरह की योजना बिगड़ गयी। कई को रातों रात एयरपोर्ट पर फेरा, बैगेज खोया, खाने-पीने का इंतजाम नहीं मिला।
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कुछ यात्रियों को इस दौरान भारी – अतिरिक्त खर्च झेलना पड़ा क्योंकि उन्हें दूसरे रूट्स लेने पड़े।
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सोशल मीडिया पर गुस्सा और आलोचना बढ़ी, यात्रियों ने एयरलाइन के रवैये और सरकार/नियामक एजेंसी की नाकामी पर सवाल उठाए। (कई दुखद वाकये सामने आए — जैसे शादी में भाग न पा पाए लोग, बुकिंग रद्द होने पर फंडिंग समस्याएँ आदि)
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देश की नागरिक उड्डयन छवि प्रभावित हुई; यह दिख गया कि एयरलाइंस का “कम लागत + हाई फ्लाइट घनत्व” मॉडल, जब सुरक्षा-नियमों से मेल न खाए, तो यात्रियों की सुविधा भी खतरे में पड़ सकती है।
🏛️ सरकारी और इंडस्ट्री रिएक्शन
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DGCA ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एक चार-सदस्य समिति बनाई, जो इस पूरे संकट की जांच और भविष्य की रणनीति तय करेगी।
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सरकार (मंत्रालय) ने निर्देश दिए कि प्रभावित यात्रियों को तुरंत रिफंड मिले — बिना rescheduling शुल्क (penalty) के
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इसके अलावा, कुछ नीतिगत कदम उठाए गए — जैसे कि किराये (fare) पर कैप लगाने जैसे उपाय, ताकि मांग-परिशानी के दौरान एयरलाइन मनमानी किराए न वसूल सके।
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कुछ राहत भले आई हो — जैसे 95% नेटवर्क connectivity बहाल करने की कोशिश — लेकिन यात्रियों के भरोसे और एयरलाइंस की विश्वसनीयता पर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं।
आगे क्या हो सकता है — सबक, चुनौतियाँ, समाधान
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इस संकट से एक बड़ा सबक यह है कि किसी भी एयरलाइन का “lean staffing + maximum flight frequency” मॉडल तब तक काम करता है जब तक नियम न बदलें। जैसे ही नियम बदलें — विशेष रूप से क्रू-आराम / सुरक्षा नियम — तैयारी और रणनीति बहुत ज़रूरी होती है।
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भविष्य में, अगर एयरलाइंस ने पर्याप्त पायलट/कर्मचारी ना रखा, या फ्लाइट शेड्यूल में buffer नहीं डाला — तो फिर ऐसी घटना दोबारा हो सकती है। यात्रा-मांग, मौसम, त्योहारी सीजन आदि को ध्यान में रखते हुए अभी से तैयारी करनी होगी।
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यात्रियों और नियामक, दोनों को मिलकर “पारदर्शिता, जवाबदेही, और समय-बद्ध रिफंड/क्लेम मेकानिज्म” सुनिश्चित करना चाहिए — ताकि व्यक्तिगत नुकसान हो कम, और भरोसा बना रहे।
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इस घटना के बाद, एयरलाइंस और नियामक दोनों के लिए यह समय है कि व्यावसायिक विस्तार (fleet, नेटवर्क) के साथ साथ सुरक्षा, कर्मचारियों की संतुष्टि और operational resilience पर भी जोर दें — नहीं तो फायदा — और हानि, दोनों हो सकते हैं।
वर्तमान स्थिति (जैसा अब दिसंबर 2025 में दिख रहा है)
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IndiGo ने दावा किया है कि अब उसने लगभग 95% नेटवर्क connectivity बहाल कर ली है; वर्तमान में 135 में से 138 गंतव्य (destinations) फिर से चल रहे हैं।
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सरकार एवं DGCA की निगरानी, रिफंड आदेश, और क्रू शेड्यूलिंग सुधार की कोशिश जारी है।
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हालांकि मौजूदा अस्थिरता और भरोसे की कमी के बीच, यात्रियों और निवेशकों — दोनों का विश्वास अभी “ज़रूरत से ज़्यादा सावधानी” के साथ साझा किया जा रहा है।
✏️ निष्कर्ष — क्या यह सिर्फ “एक झटका” है या संकेत है बदलाव का?
IndiGo का यह संकट — शुरुआत में एक operational disruption लग सकता था — लेकिन असल में यह उस संतुलन की कमी को उजागर करता है जिस पर भारत जैसे देश में निजी एयरलाइंस का व्यावसायिक मॉडल टिका है।
“कम लागत + अधिक उड़ानें + सीमित कर्मचारी” वाला मॉडल, जब सुरक्षा-नियमों, पायलट थकावट जैसे humane parameters के साथ टकराया — तो परिणाम भयावह हुआ।
अगर IndiGo (और अन्य एयरलाइंस) को भविष्य में ऐसा कुछ दोबारा नहीं देखना है — तो उन्हें अपनी रणनीति, मानव संसाधन प्रबंधन, और contingency planning को स्थायी और मजबूत बनाना होगा।

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