प्रौद्योगिकी को मानवीय निर्णय को बढ़ाना चाहिए, न कि इसे प्रतिस्थापित करना चाहिए: सीजेआई सूर्य कांत

🔹 मुख्य बात:
सीजेआई सूर्यकांत ने यह स्पष्ट किया कि कोर्टों में तकनीक का उपयोग मानवीय निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने के लिए होना चाहिए — न कि न्याय देने वाले मनुष्य (जज/वकील) की जगह लेने के लिए। तकनीक न्याय प्रक्रिया को तेज़ और अधिक पारदर्शी बना सकती है, लेकिन न्याय की संवेदना, विवेक और मानवीय समझ को मशीन नहीं भर सकती।

🔹 उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक में डीप फेक, डिजिटल दुरुपयोग जैसी चुनौतियाँ हैं, और इसलिए सिर्फ़ तकनीक पर अंधावलंबी नहीं होना चाहिए। तकनीक ऐसे सुधारों को जन्म दे सकती है जो गरीब, बुजुर्ग और डिजिटल रूप से अपरिचित लोगों के लिए न्याय को और सुलभ बनाएं, लेकिन अगर यह उन्हें बाहर रखे तो वह वास्तविक सुधार नहीं, बल्कि प्रतिगमन है।

📌 संक्षेप में:
📍 “तकनीक को न्याय की सेवा में रहना चाहिए, उसके विकल्प के रूप में नहीं।”
📍 “यह मानवीय निर्णय को बढ़ाए, न कि उसे बदल दे।

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