मनरेगा (MGNREGA) के नए नाम / बदलाव को लेकर चल रहे बड़े मुद्दे की पूरी जानकारी

 


1. मनरेगा क्या थी — मूल योजना का सार

मनरेगा पूरे भारत की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना है, जिसे MGNREGA यानी Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act, 2005 कहते हैं। इसका उद्देश्य था:

✔ हर ग्रामीण घर को 100 दिन तक की रोज़गार गारंटी देना
✔ ग्रामीणों को बुनियादी कृषि-और ढांचागत काम जैसे जल संरक्षण, सड़क निर्माण, नहर कार्य आदि में मजदूरी प्रदान करना

यह कानून 2005 में कांग्रेस सरकार के नेतृत्व में लागू हुआ था, और इसमें ‘महात्मा गांधी’ का नाम इसलिए रखा गया था कि इसका उद्देश्य गांधीजी के ग्रामीण विकास के विचारों को साकार करना था।

2. अब क्या हुआ है — नाम बदलने की वजह

दिसंबर 2025 में केंद्र सरकार ने MGNREGA का नाम बदलने का प्रस्ताव संसद में पेश किया है। इसके पीछे कारण बताया जा रहा है कि इसे *नया रूप, नया उदेश्य और *“विकसित भारत – 2047” के विज़न से जोड़ना है। 

सरकार के प्रस्तावित नए नाम हैं:

📌 VB-G RAM GViksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin)

जिसे मीडिया में अक्सर “जी राम जी योजना” के रूप में भी बताया जा रहा है।

कुछ रिपोर्टों में इसे “पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना / Pujya Bapu Gramin Rozgar Yojana” के तौर पर भी बताया गया है, लेकिन मुख्य विधेयक का नाम VB-G RAM G ही बताया जा रहा है।


3. नए नाम के साथ क्या बदलाव होंगे?

सरकार के प्रस्ताव के अनुसार:

गारंटीकृत कार्य दिवस बढ़ेंगे
अब पहले के 100 दिन के बजाय 125 दिन रोज़गार ग्रामीण घरों को मिलेंगे। 

योजना के उद्देश्यों को विस्तारित करना
ग्राम स्तर पर रोज़गार, आजीविका और ग्रामीण विकास को जोड़ने के लिए नया रूप दिया जा रहा है। 

📌 हालांकि इसे लेकर पारदर्शिता, फंडिंग मॉडल और कानूनी दायरे में बदलाव भी प्रस्तावित हैं, जिससे योजना अब केंद्रीय-राज्य साझेदारी के तहत चलेगी

4. विरोध और बहस — क्यों गर्म हुआ मुद्दा?

नाम बदलने पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी बहस चल रही है:

🔹 कांग्रेस और विपक्ष का कहना:
• ‘मनरेगा’ में गांधी का नाम हटाना गलत है और इसे गांधी-विरोधी कदम बताया जा रहा है। 
• विपक्ष का आरोप है कि नाम बदलकर योजना की असल समस्याओं से ध्यान हटाया जा रहा है।

🔹 सरकार का पक्ष:
• सरकार कहती है कि यह नाम परिवर्तन योजना को नए स्वरूप और ग्रामीण विकास के बड़े लक्ष्य से जोड़ता है, और इससे ग्रामीणों को पहले से बेहतर लाभ मिलेगा।

🔹 कुछ वकील और सामाजिक कार्यकर्ता कहते हैं:
नाम बदलना सिर्फ एक प्रतीकात्मक बदलाव नहीं, बल्कि अधिकार-आधारित गारंटी से योजना को बदल सकता है, जिससे ग्रामीणों को मिलने वाली सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। 

5. राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

संसद में भी विरोध और बहस तेज हो गई है, जहाँ विपक्ष नाम हटाने के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन कर रहा है। 
• कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी नाम बदलने से पहले व्यापक चर्चा और परामर्श की मांग की है। 
• कई सामाजिक संगठनों ने योजना के मौलिक कानून को बदलने के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है।



निष्कर्ष — नाम बदलाव सिर्फ नाम नहीं

मनरेगा के नाम बदलने का मसला सिर्फ शब्दों का परिवर्तन नहीं है। यह:

ग्रामीण रोजगार की दिशा बदलने का प्रयास है
राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस का विषय बन गया है
लोगों के अधिकार और सरकारी नीति की प्रगति पर गहरा प्रभाव डाल सकता है

भविष्य में इसके पारित होने के बाद लागू प्रक्रिया, रोजगार गारंटी की गुणवत्ता और फंडिंग पैटर्न जैसे मुद्दों पर और बड़ा असर पड़ेगा।


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धन्यवाद 🙏

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